Saturday, 1 December 2018

इतिहास की 3 सबसे खतरनाक जेल Most Dangerous Prisons From History


Most Dangerous Prisons From History in Hindi: जेल की दीवारें सिक्के के दो पहलू की तरह होते हैं जिनके एक तरफ तेज रफ्तार दुनिया अपनी गति से आगे बढ़ती है, वही दीवार के इस बार मानो वक्त थम सा जाता है। लेकिन जेल इसी का नाम है, जो कैदियों को उनकी गलती का एहसास कराती है। दोस्तों अब तो कैदियों को अपनी रिहाई तक का समय काटना पड़ता है। लेकिन इतिहास इन्हीं कैदियों पर बहुत बेरहम रहा है। जहां यह कैदी रिहाई तो बहुत दूर की बात है, बल्कि वह अपने जीने की आस तक छोड़ देते थे। कैदियों को इंतजार रहता था तो केवल मौत आने का, जो उन्हें इस दर्दनाक जिंदगी से छुटकारा दिला सके। दोस्तों आज हम अपना का यह पोस्ट इतिहास के ऐसे ही निर्दयी कारागार (जेल) के बारे में है, जिनकी यातनाएं अर्थात सजा जानकर किसी भी इंसान की रूह कांप सकती है। Most Dangerous Prisons From History.


Death Coffins:Mangolia

रूस और चीन के बीचो बीच मौजूद पूर्वी एशिया का देश मंगोलिया कभी अपने कैदियों को ऐसी यातनाएं देता था जिनके बारे में सोच कर, किसी की भी रूह कांप सकती है। 20वी सदी की शुरुआत तक इस देश में कैदियों को दंड के रूप में 3/4  फिट के एक बक्से में कैद कर दिया जाता था। जिसमें कैदी ना ठीक से बैठ सकता था और ना ही लेट सकता था। मंगोलिया में मौजूद ‘पुरकाजी’ में ऐसी लाखों कैदियों ने तड़प-तड़प कर अपनी जाने दे दी। जहां उन लोगों को इन्हीं बक्सों में कैद कर दिया जाता था। डेथ कॉफीनस (Death Coffins) नाम से मशहूर 3/4 के यह बक्से कहने को तो सजा देने के लिए बनाए गए थे, लेकिन असल में यह अपने नाम की तरह मौत का साधन थे। जिस में जाने के बाद किसी की रिहाई तब तक नहीं होती थी, जब तक कि वह अपने प्राण ना त्याग दें। लगभग 6 इंच का एक छोटा सा छेद जो खाना खाने के लिए होता था। वहीं कैदियों द्वारा किए गए मल-मूत्र को भी कई हफ्तों तक इस बक्से से साफ नहीं किया जाता था। इतनी यातनाएं देने के बाद भी अगर इन कैदियों पर कोई दया की जाती थी तो वह यह थी यह लोग अपनी मर्जी से सर्दियों के मौसम में खुले आसमान के नीचे इन बक्सों में रह सकते हैं। ताकि पारा(तापमान) गिरने से इनकी मौत हो सके। शायद अपनी जिंदगी के आखिरी पलों में खुले आसमान के नीचे अपनी जान देना पूरी जिंदगी इस नर्क में सड़ने से कहीं बेहतर रहा होगा।

Memertine Prison: Rome

माना जाता है कि प्राचीन रोम के सम्राट ‘अंकस मार्सेस’ ने ही सबसे पहले दंड देने की प्रथा की शुरुआत की थी। और 640 ईसवी पूर्व में सजा देने के लिए एक कारागार भी बनवाई थी जिसे आज हम ‘मेमेटीन कारागार’  के नाम से जानते हैं। यह कोई खुले आसमान के नीचे चार दीवारों से घिरी जेल नहीं थी, बल्कि एक भूमिगत नाला था। जिसकी गहराई लगभग 6.30 फीट, और लंबाई 30 फीट थी। लगभग 22 फीट चौड़ाई वाले इस नाले से होकर पूरे इलाके का मल-मूत्र बहता था। जहां कैदियों को उनकी सजा की सुनवाई तक रहना पड़ता था। किस्मत से राजा के सामने अगर पेशी हुई तो ठीक वरना कई दिनों तक भूखे-प्यासे कैदी इस नाले में ही अपना दम तोड़ देते थे। माना जाता है कि सुनवाई तो एक बहाना थी असल में इस कारागार के वजूद में आने की असली वजह ही कैदियों को मौत देना था। जिससे कि पूरे शासन को याद रहे कि जिस किसी ने भी कानून का उल्लंघन करने की कोशिश की उसे ऐसी क्रूर यातनाएं झेलनी पड़ सकती हैं।इस नाले को कारागार के रूप में इस तरह से बनाया गया था कि जिस किसी की भी मौत इसके अंदर हो, उनके शव खुद ब खुद एक दरवाजे के रास्ते नदी में बह कर बहुत दूर चले जाएं। खैर मेमेटीन कारागार तो आज के दौर में एक चर्च के रूप में परिवर्तित हो गया। लेकिन ईसापूर्व के उस युग में इसने कितने कैदियों की दर्दनाक तरीके से जान ली होगी शायद हम कल्पना भी नहीं कर पाएं। Most Dangerous Prisons From History

Andersonville: Civil War

अमेरिकी सिविल वॉर एक ऐसा गृह युद्ध जिसने सदियों से चली आ रही स्लेवरी यानी गुलामी की प्रथा को जड़ से उखाड़ दिया और लाखों गुलामों को आजादी से रहने और जीने का हक दिलाया। लेकिन दोस्तों गुलामी से आजादी वाली इस सुबह तक का सफर इतना आसान नहीं था। दोस्तों वह सोच जिसने क्रांति का रुप ले लिया और अपने ही नागरिकों को बागी बना दिया।
साल 1861 से लेकर 1865 तक चलने वाले इस युद्ध में उन लोगों को बंदी बनाया गया जो गुलामी के विरोध में खड़े हुए थे। इन लोगों का बलिदान सिर्फ कैद होने तक सीमित नहीं था, क्योंकि जिस कारागार में उन्हें कैद किया गया था उस जेल का नाम था ‘एंडरसन विलय’। एक ऐसा कारागार जिसके आगे शायद नर्क भी बेहतर जगह लगे। दोस्तों इतिहासकार इस जेल के बारे में बतलाते हैं कि इस युद्ध के दौरान एंडरसन विलय अपनी क्षमता से 4 गुना ज्यादा कैदियों से भरी हुई थी। जहां कैदियों के खाने पीने का कोई इंतजाम नहीं था। यहां तक कि वह लोग मल-मूत्र भी वही करते थे। कुछ भूख और प्यास से दम तोड़ देते थे और बचे हुए कैदियों को जानलेवा बीमारी घेर लेती थी।
एंडरसन विलय के इन भयानक हालातों पर कई लेख भी लिखे गए, जहां उन बंदियों को एक जिंदा लाश तक बताया गया।
दोस्तों युद्ध तो समाप्त हुआ दोषियों पर कार्यवाही भी की गई, लेकिन इन कैदियों को इंसाफ कभी ना मिल सका। और गुलामी से जो आजादी मिली उसका जश्न मनाने के लिए ये लोग अब जिंदा नहीं थे।

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